रोको मत टोको मत 
सोचने दो इन्हें सोचने दो 
रोको मत टोको मत 
होए टोको मत इन्हें सोचने दो 

मुश्किलों के हल खोजने दो 
रोको मत टोको मत 
निकलने तो दो आसमां से जुड़ेंगे 
अरे अंडे के अन्दर ही कैसे उड़ेंगे यार 

निकालने दो पाँव जुराबें बहुत हैं 
किताबों के बाहर किताबें बहुत हैं 

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जय हो, जय हो
जय हो, जय हो
आजा आजा जिंद शामियाने के तले, 
आजा ज़रीवाले नीले आसमान के तले

जय हो, जय हो
जय हो, जय हो


रत्ती रत्ती सच्ची मैने जान गँवाई है, 
नच नच कोयलों पे रात बिताई है
अखियों की नींद मैने फूंको से उड़ा दी,
गिन गिन तारे मैने उंगली जलाई है

जय हो, जय हो
जय हो, जय हो

चख ले हो चख ले ये रात शहद है चख ले, 
रख ले हाँ दिल है दिल आखरी हद है रख ले
काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है ना
काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है ना

आजा आजा जिंद शामियाने के तले, 
आजा ज़रीवाले नीले आसमान के तले


जय हो, जय हो
जय हो, जय हो

कब से हाँ कब से जो लब पे रुकी है कह दे,
कह दे हाँ कह दे अब आँख झुकी है.. कह दे
ऐसी ऐसी रोशन आँखे रोशन दोनो भी हैं हैं क्या

आजा आजा जिंद शामियाने के तले, 
आजा ज़रीवाले नीले आसमान के तले

जय हो, जय हो
जय हो, जय हो

जब भी यह दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है 

होंठ चुपचाप बोलते हों जब
सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती हो
आंखें जब दे रही हों आवाज़ें
ठंडी आहों में सांस जलती हो 

आँख में तैरती हैं तसवीरें
तेरा चेहरा तेरा ख़याल लिए
आईना देखता है जब मुझको
एक मासूम सा सवाल लिए 

कोई वादा नहीं किया लेकिन
क्यों तेरा इंतजार रहता है
बेवजह जब क़रार मिल जाए
दिल बड़ा बेकरार रहता है 

जब भी यह दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है


(2)
हाल-चाल ठीक-ठाक है
सब कुछ ठीक-ठाक है
बी.ए. किया है, एम.ए. किया
लगता है वह भी ऐंवे किया
काम नहीं है वरना यहाँ
आपकी दुआ से सब ठीक-ठाक है 

आबो-हवा देश की बहुत साफ़ है
क़ायदा है, क़ानून है, इंसाफ़ है
अल्लाह-मियाँ जाने कोई जिए या मरे
आदमी को खून-वून सब माफ़ है 

और क्या कहूं?
छोटी-मोटी चोरी, रिश्वतखोरी
देती है अपा गुजारा यहाँ
आपकी दुआ से बाक़ी ठीक-ठाक है 

गोल-मोल रोटी का पहिया चला
पीछे-पीछे चाँदी का रुपैया चला
रोटी को बेचारी को चील ले गई
चाँदी ले के मुँह काला कौवा चला 

और क्या कहूं?
मौत का तमाशा, चला है बेतहाशा
जीने की फुरसत नहीं है यहाँ
आपकी दुआ से बाक़ी ठीक-ठाक है
हाल-चाल ठीक-ठाक है


(3)
अ-आ, इ-ई, अ-आ, इ-ई
मास्टर जी की आ गई चिट्ठी
चिट्ठी में से निकली बिल्ली
बिल्ली खाए जर्दा-पान
काला चश्मा पीले कान
कान में झुमका, नाक में बत्ती
हाथ में जलती अगरबत्ती
अगर हो बत्ती कछुआ छाप
आग में बैठा पानी ताप
ताप चढ़े तो कम्बल तान
वी.आई.पी. अंडरवियर-बनियान 

अ-आ, इ-ई, अ-आ, इ-ई
मास्टर जी की आ गई चिट्ठी
चिट्ठी में से निकला मच्छर
मच्छर की दो लंबी मूँछें
मूँछ पे बाँधे दो-दो पत्थर
पत्थर पे इक आम का झाड़
पूंछ पे लेके चले पहाड़
पहाड़ पे बैठा बूढ़ा जोगी
जोगी की इक जोगन होगी
-गठरी में लागा चोर
मुसाफिर देख चाँद की ओर 

पहाड़ पै बैठा बूढ़ा जोगी
जोगी की एक जोगन होगी
जोगन कूटे कच्चा धान
वी.आई.पी. अंडरवियर बनियान 

अ-आ, इ-ई, अ-आ, इ-ई
मास्टर जी की आ गई चिट्ठी
चिट्ठी में से निकला चीता
थोड़ा काला थोड़ा पीला
चीता निकला है शर्मीला
घूँघट डालके चलता है
मांग में सेंदुर भरता है
माथे रोज लगाए बिंदी
इंगलिश बोले मतलब हिंदी
‘इफ’ अगर ‘इज’ है, ‘बट’ पर
‘व्हॉट’ माने क्या
इंगलिश में अलजेब्रा छान
वी.आई.पी. अंडरवियर-बनियान

 
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है

काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आज भी जुनूनी सी
जो एक आरज़ू है
यूँ ही तरसने दे
यह आँखें बरसने दे
तेरी आँखें दो आँखें
कभी शबनम कभी खुशबू है

काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है

[काली काली आँखों काला काला जादू] 

गहरे समंदर और दो जज़ीरे
डूबे हुए हैं कितने ज़खीरे
ढूँढने दो अश्कों के मोती
सीपी से खोलो
पलकों से झांके तो झाँकने दो
कतरा कतरा गिनने दो
कतरा कतरा चुनने दो
कतरा कतरा रखना है ना
कतरा कतरा रखने दो
तेरी आँखों का यह साया
अँधेरे में कोई जुगनू है

काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है

जाने कहाँ पे बदलेंगे दोनों
उड़ते हुए यह शब के परिंदे
पलकों पे बैठा ले के उड़े हैं
दो बूँद दे दो प्यासे पड़े हैं
हाँ दो बूँदें
लम्हा लम्हा लम्हे दो
लम्हा लम्हा जीने दो
कह भी दो ना आँखों से
लम्हा लम्हा पीने दो
तेरी आँखें हल्का सा
छलका सा एक आंसू है

काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है

काली काली आँखों का
काला काला जादू है

दिल मियाँ मिट्ठू थे
मर्ज़ी के पिट्ठू थे
हो दिल मियाँ मिट्ठू थे
अरे मर्ज़ी के पिट्ठू थे
वो मेरी कहाँ सुनते थे
अरे अपनी ही धुन पे थे
दिल मियाँ मिट्ठू थे

मियाँ जी बच बच के चलना
दुनिया है हरजाई
हरी हरी जो लागे
घास खड़ी है काई
अरे काई पे फिसले जो सुर्र करके
फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए


इश्क में यूँ फिसले मियाँ
हाथों के तोते उड़ गए
तोते उड़ गए
फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए

दिल मियाँ मिट्ठू थे
मर्ज़ी के पिट्ठू थे
अकड़े तो तगड़े से
और पकडे तो मकड़े से
दिल मियाँ मिट्ठू थे मिट्ठू मियाँ
मियाँ जी मुड़ मुड़ के न देखो
मुड़ मुड़ न देखो मियाँ जी
अजी नज़रों में कोई नहीं है
नज़र लगाईं थी अंखियाँ हाँ
सालों से सोई नहीं हैं
सपने से धंसने पे सुर्र

तोते! फुर्र करके तोते उड़ गए
ओ पतली गली में फिसले मियाँ
हाथो के तोते उड़ गए

मेरे नग मुंदरी विच पा दे
ते पावे मेरी जिंद कड लै
के पावे मेरी जिंद कड लै
अक्खी रात मैं गई तबेले
माझी मिल जावे.
मुक जान झमेले 
माझी मिल जावे...
मुक जान झमेले 
मेरी सेज ते अकल बिछा दे
ते पावे मेरी जिंद कड लै 
के पावे मेरी जिंद कड लै 

फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र करके तोते उड़ गए
फुर्र फुर्र करके तोते उड़ गए

मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझे
आज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंने

 

रात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे

 

२.
सारा दिन बैठा,मैं हाथ में लेकर खा़ली कासा(भिक्षापात्र)
रात जो गुज़री,चांद की कौड़ी डाल गई उसमें

 

सूदखो़र सूरज कल मुझसे ये भी ले जायेगा।

 

३.
सामने आये मेरे,देखा मुझे,बात भी की
मुस्कराए भी,पुरानी किसी पहचान की ख़ातिर

 

कल का अख़बार था,बस देख लिया,रख भी दिया।

 

४.
शोला सा गुज़रता है मेरे जिस्म से होकर
किस लौ से उतारा है खुदावंद ने तुम को

 

तिनकों का मेरा घर है,कभी आओ तो क्या हो?

 

'५.
ज़मीं भी उसकी,ज़मी की नेमतें उसकी
ये सब उसी का है,घर भी,ये घर के बंदे भी

 

खुदा से कहिये,कभी वो भी अपने घर आयें!

 

६.
लोग मेलों में भी गुम हो कर मिले हैं बारहा
दास्तानों के किसी दिलचस्प से इक मोड़ पर

 

यूँ हमेशा के लिये भी क्या बिछड़ता है कोई?

 

७.
आप की खा़तिर अगर हम लूट भी लें आसमाँ
क्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के!

 

चाँद चुभ जायेगा उंगली में तो खू़न आ जायेगा

 

८.
पौ फूटी है और किरणों से काँच बजे हैं
घर जाने का वक्‍़त हुआ है,पाँच बजे हैं

 

सारी शब घड़ियाल ने चौकीदारी की है!

 

९.
बे लगाम उड़ती हैं कुछ ख्‍़वाहिशें ऐसे दिल में
‘मेक्सीकन’ फ़िल्मों में कुछ दौड़ते घोड़े जैसे।

 

थान पर बाँधी नहीं जातीं सभी ख्‍़वाहिशें मुझ से।

 

१०.
तमाम सफ़हे किताबों के फड़फडा़ने लगे
हवा धकेल के दरवाजा़ आ गई घर में!

 

कभी हवा की तरह तुम भी आया जाया करो!!

 

११.
कभी कभी बाजा़र में यूँ भी हो जाता है
क़ीमत ठीक थी,जेब में इतने दाम नहीं थे

 

ऐसे ही इक बार मैं तुम को हार आया था।

 

१२.
वह मेरे साथ ही था दूर तक मगर इक दिन
जो मुड़ के देखा तो वह दोस्त मेरे साथ न था

 

फटी हो जेब तो कुछ सिक्के खो भी जाते हैं।

 

१३.
वह जिस साँस का रिश्ता बंधा हुआ था मेरा
दबा के दाँत तले साँस काट दी उसने

 

कटी पतंग का मांझा मुहल्ले भर में लुटा!

 

१४.
कुछ मेरे यार थे रहते थे मेरे साथ हमेशा
कोई साथ आया था,उन्हें ले गया,फिर नहीं लौटे

 

शेल्फ़ से निकली किताबों की जगह ख़ाली पड़ी है!

 

१५.
इतनी लम्बी अंगड़ाई ली लड़की ने
शोले जैसे सूरज पर जा हाथ लगा

 

छाले जैसा चांद पडा़ है उंगली पर!

 

१६.
बुड़ बुड़ करते लफ्‍़ज़ों को चिमटी से पकड़ो
फेंको और मसल दो पैर की ऐड़ी से ।

 

अफ़वाहों को खूँ पीने की आदत है।

 

१७.
चूड़ी के टुकड़े थे,पैर में चुभते ही खूँ बह निकला
नंगे पाँव खेल रहा था,लड़का अपने आँगन में

 

बाप ने कल दारू पी के माँ की बाँह मरोड़ी थी!

 

१८.
चाँद के माथे पर बचपन की चोट के दाग़ नज़र आते हैं
रोड़े, पत्थर और गु़ल्लों से दिन भर खेला करता था

 

बहुत कहा आवारा उल्काओं की संगत ठीक नहीं!

 

१९.
कोई सूरत भी मुझे पूरी नज़र आती नहीं
आँख के शीशे मेरे चुटख़े हुये हैं कब से 

 

टुकड़ों टुकड़ों में सभी लोग मिले हैं मुझ को!

 

२०.
कोने वाली सीट पे अब दो और ही कोई बैठते हैं
पिछले चन्द महीनों से अब वो भी लड़ते रहते हैं

 

क्लर्क हैं दोनों,लगता है अब शादी करने वाले हैं

 

२१.
कुछ इस तरह ख्‍़याल तेरा जल उठा कि बस
जैसे दीया-सलाई जली हो अँधेरे में

 

अब फूंक भी दो,वरना ये उंगली जलाएगा!

 

२२.
कांटे वाली तार पे किसने गीले कपड़े टांगे हैं
ख़ून टपकता रहता है और नाली में बह जाता है

 

क्यों इस फौ़जी की बेवा हर रोज़ ये वर्दी धोती है।

 

२३.
आओ ज़बानें बाँट लें अब अपनी अपनी हम
न तुम सुनोगे बात, ना हमको समझना है।

 

दो अनपढ़ों कि कितनी मोहब्बत है अदब से

 

२४.
नाप के वक्‍़त भरा जाता है ,रेत घड़ी में-
इक तरफ़ खा़ली हो जबफिर से उलट देते हैं उसको

 

उम्र जब ख़त्म हो ,क्या मुझ को वो उल्टा नहीं सकता?

 

२५.
तुम्हारे होंठ बहुत खु़श्क खु़श्क रहते हैं
इन्हीं लबों पे कभी ताज़ा शे’र मिलते थे

 

ये तुमने होंठों पे अफसाने रख लिये कब से?